अनुच्छेद 21 -A में शामिल है ऑनलाइन शिक्षा का अधिकार

ADV. SYED AJMAL HASAN

भारतीय संविधान में आर्टिकल-21ए को ( 86 वां संविधान संशोधन 2002) द्वारा सम्मिलित किया गया है। इस संशोधन द्वारा 6 से 14 साल के सभी बच्चों को उनके नजदीक के सरकारी स्कूल में नि:शुल्‍क और अनिवार्य शिक्षा देने का प्रावधान किया गया है। यहां नि:शुल्‍क शिक्षा का तात्पर्य है कि बच्चों के अभिभावकों से स्कूल की फीस, बच्चे के यूनिफार्म और पुस्तकों के लिए कोई पैसे नहीं लिया जाता है । दूसरी और निजी स्कूल इस अधिनियम के तहत 25 प्रतिशत बच्चों का नामांकन बिना किसी शुल्क के किया जाएगा। निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति वर्ग को शामिल किया गया है

निःशुल्क शिक्षा के लिये 2 जुलाई 2009 को कैबिनेट से पास किया गया 20 जुलाई 2009 को राज्य सभा से और 4 अगस्त 2009 को लोकसभा से पास किया गया |

शिक्षा का अधिकार अधिनियम को 8 अप्रैल 2010 को जम्मू कश्मीर को छोड़ कर पूरे भारत वर्ष में लागू किया गया |


मुख्य बिंदु,

शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2002 के अंतर्गत सभी 6-14 वर्ष की आयु के बच्चों को मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।

निजी स्कूलों में 6 से 14 वर्ष आयु के 25% गरीब व पिछड़े वर्ग के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा के अंतर्गत शामिल किया जाएगा |

यदि कोई निजी स्कूल अधिनियम की शर्तों की अनदेखी करता है तो फीस से 10 गुना अधिक जुर्माना तथा स्कूल की मान्यता को रद्द भी किया जा सकता है जो स्कूल की मान्यता रद्द होने पर स्कूल को संचालित करने पर जुर्माने की राशि कई गुना बढ़ाया जा सकता है |

बच्चों को निःशुल्क शिक्षा मुहैया करवाने की ज़िम्मेदारी केंद्र तथा राज्य की होगी|

इस अधिनियम द्वारा जिन बच्चों का प्रवेश (एडमिशन) नहीं हुआ हो, वो अपनी आयु वर्ग के अनुसार एडमिशन करवा सकते है।

जब तक बच्चे की प्राथमिक शिक्षा पूरी नहीं हो जाती तब तक किसी भी बच्चे को न रोका जाएगा, न निकाला जाएगा और न ही बोर्ड परीक्षा में आगे बढ़ाया जाएगा।

जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं, वो निजी स्कूल में 25 प्रतिशत आरक्षित सीट के लिए आवेदन भर सकते हैं।

एक परिवार जिसकी वार्षिक आय 3.5 लाख या उससे कम है, वो आरटीई अधिनियम के तहत सीटों के लिए आवेदन कर सकते हैं।

पहला मामला हाल ही में कर्नाटक राज्य सरकार ने ऑनलाइन शिक्षा पर रोक लगाई जब यह मामला कर्नाटक हाई कोर्ट में गया तो राज्य सरकार का आदेश प्रथम दृष्ट्या संविधान के अनुच्छेद 21 और 21 A के अंतर्गत दिये गये जीवन और शिक्षा के मौलिक अधिकारों का अतिक्रमण है |

चीफ जस्टिस अभय श्रीनाथदास ओका और जस्टिस नटराज रंगास्वामी की खंडपीठ ने कहा कि हम मानते हैं कि राज्य के आदेश 15 जून 2020 और 27 जून 2020 के दोनों आदेश, संविधान के अनुच्छेद 21 और 21 ए के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का अतिक्रमण करते हैं।”

दूसरा मामला हाल ही में आँध्रप्रदेश हाई कोर्ट में आया राज्य सरकार ने प्राथमिक शिक्षा को अंग्रेजी माध्यम में अनिवार्य कर दिया जिसका माध्यम अब तक तेलगु भाषा में था |आंध्रप्रदेश हाई कोर्ट ने इस सरकारी आदेश को भी ख़ारिज कर दिया |

अनुच्छेद 19 (1) (ए) हाईकोर्ट ने कहा कि प्राथमिक स्तर पर शिक्षा के माध्यम चुनने का विकल्प एक मौलिक अधिकार है।

पीठ ने कहा “शिक्षा का माध्यम, जिसमें नागरिक को शिक्षित किया जा सकता है, वह अभिव्यक्ति और भाषण की स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न अंग है।”
अनुच्छेद 19 के खंड (2), 19 (2) और 19 (1) जी का अतिक्रमण करता है |

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