क्या है अनुच्छेद 17

HAMNA

NEW DELHI :-अनुच्छेद 17 (अस्पृश्यता का अंत ) या सामाजिक विषमता एवं विशेषाधिकारों की समाप्ति, अनुच्छेद 17 क्षमता के अधिकार को एक क्षेत्र विशेष में लागू करता है और अस्पृश्यता के अंत की घोषणा करता है इसके अनुसार छुआछूत प्रतिबंधित है ऐसा करना दंडनीय अपराध है इसके तहत अभियुक्त को 6 माह का कारावास या 500 जुर्माना या दोनों को देना पड़ सकता है

भारतीय संविधान में अनुच्छेद 17 का व्यवहार में क्रियाविन्त करने के लिए 1955 में संसद के द्वारा विधि का निर्माण किया गया जिसे छुआछूत अधिनियम के रूप में जाना जाता है जिसका नाम 1976 में बदलकर सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम रखा गया

छुआछूत का अधिनियम :- ना कि संविधान में और ना ही संसदीय अधिनियम में छुआछूत का वर्णन है अधिनियम में निम्न कार्यों को छुआछूत का पर्याय माना गया है

  • किसी का जाति सूचक शब्द द्वारा अपमान करना
  • जाति के आधार पर सार्वजनिक स्थानों में प्रवेश से रोकना
  • जाति के आधार पर किसी की सामाजिक सेवा वितरित करने से इनकार करना
  • संवैधानिक प्रावधानों के अतिरिक्त प्रावधान अस्पृश्यता के उन्मूलन के लिये कुछ विधिक प्रावधान भी किए गए हैं

सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम:-

  1. संसद में अस्पृश्यता के अंत के लिए अधिनियम पारित किया गया अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 पारित किया तथा 1976 में इसका संशोधन कर इसका नाम सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम कर दिया गया
  2. अनुसूचित जाति एवं जनजाति उत्पीड़न निवारण अधिनियम 1989 के तहत प्रथम बार उत्पीड़न शब्द की व्यापक व्याख्या की गई केंद्र सरकार ने इस अधिनियम से प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए 1995 में नियमावली का निर्माण भी किया
  3. 2015 में उपरोक्त अधिनियम के संशोधन के माध्यम से पुराने प्रावधानों को और अधिक सख्त कर दिया गया है
  4. इसमें उत्पीड़न की परिभाषा में कई और कृत्यों जैसे सिर व मूछ मोड़ना अपनों की माला पहनाना जनजातीय महिलाओं को देवदासी बनाना आदि को भी शामिल किया गया है
  5. इस नए अधिनियम में मामलों के त्वरित निवारण एवं निर्णय के लिए विशेष अदालतों के गठन का भी प्रावधान
    किया गया है

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