गिरफ्तार करने वाला अधिकारी कर्तव्य पूरा नहीं करता है तब गिरफ्तारी अनुचित कही जायगी

IQBAL

NEW DELHI :किसी अपराधी को पुलिस अधिकारी गिरफ्तार करता है तो दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 41 ख पुलिस अधिकारी को निम्न कर्तव्यों का निर्वहन करने का आदेश देती है यदि गिरफ्तार करने वाला अधिकारी कर्तव्य पूरा नहीं करता है तब गिरफ्तारी अनुचित कही जायगी

पुलिस अधिकारी के कर्तव्ये

1- पुलिस अधिकारी अपनी सहज पहचान हेतु अपने नाम का सही स्पष्ट रूप से पहचान के साथ अपनी वर्दी पर नाम पलेट लगाएगा

2- अभियुक्त की गिरफ्तारी का ज्ञापन तैयार करेगा जो
एक साक्षी द्वारा प्रमाणित हो

 जो साक्षी ज्ञापन को प्रमाणित कर रहा है अभियुक्त के कुटुंब का सदस्य हो या क्षेत्र का प्रतिनिधि जो जानता हो |

गिरफ्तारी का ज्ञापन गिरफ्तार किये गये व्यक्ति द्वारा प्रति हस्ताक्षरित होना चाहिए

यदि गिरफ्तारी का ज्ञापन उसके कुटुंब के सदस्य या क्षेत्र के प्रतिनिधि जो जानता हो द्वारा प्रमाणित नहीं हो पाया है तो गिरफ्तार किये गये व्यक्ति को सूचित करेगा कि उसे अपने नाते दार या मित्र को अपनी गिरफ्तारी की सूचना देने का अधिकार है

अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य AIR 2014 SC 2756
यह मामला दहेज़ व क्रूरता पर आधारित है जो दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 41, 41 A की वैधता पर आधारित है न्यायालय का कहना है कि दहेज़ एवं क्रूरता के प्रत्येक मामले में अभियुक्त की गिरफ्तारी आवश्यक नहीं है

धारा 41 एवं 41 A के अनुपालन के निर्देश

1- न्यायालय ने कहा कि गिरफ्तारी इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि अपराध ग़ैर जमानतीय और संज्ञाय प्रकृति का है

2- पुलिस अधिकारी को गिरफ्तारी के कारणों को प्रदर्शित करना होगा

3- पुलिस अधिकारी गिरफ्तार होने वाले अपराधी को उसके अपराध के बारे में बताना होगा कि वह उसने क्या अपराध किया है

4- विधि आयोग की 171 वीं रिपोर्ट 2001 के आधार पर दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 गिरफ्तारी सम्बन्धी दिशा निर्देश से सम्बंधित उपबंध को 2008 में धारा 41 A के रूप में जोड़ा गया जिसका अनुपालन किया जाना चाहिए परन्तु कुछ मामलों में अनुपालन नहीं किया जाता है यदि धारा 41A के अंतर्गत गिरफ्तारियों को सही ढंग से किया जाए तो न्यायालय में अग्रिम ज़मानत की याचिकाओं में आ सकती है

पुलिस को समय समय पर निर्देश जारी किये जाते हैं कि अनावश्यक रूप से गिरफ्तारी ना की जाए इस मामले में कहा गया कि यह दिशा निर्देश केवल भारतीय दण्ड संहिता 498 A और दहेज़ प्रतिषेध अधिनियम की धारा 4 पर ही नहीं बल्कि ऐसे सभी मामलों पर लागू होते हैं जो मामले सात वर्ष से कम कारावास से दंडनीय हैं |

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