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NEW DELHI :-डिक्री सिविल प्रक्रि]या संहिता 1960 की धारा 2(2 )में डिक्री को समझाया गया है की डिक्री क्या होती है संहिता में अनेक बार डिक्री शब्द का प्रयोग किया गया है इसलिए डिग्री शब्द को समझना जरूरी हो जाता है

डिक्री न्याय निर्णय की एक-एक औपचारिक अभिव्यक्ति है जो बाद में उत्पन्न होने वाले वादग्रस्त बिंदुओं के संबंध में पक्षकारों के अधिकारों का अंतिम रूप से निर्धारण करती है

डिक्री प्रारंभिक एवं अंतिम हो सकती है
इसके अंतर्गत किसी वाद पत्र की अस्वीकृति और धारा 144 के अंतर्गत किसी प्रकार का अवधारण भी डिक्री समझा जाएगा

इसके अतिरिक्त, ऐसा कोई निर्णय डिक्री नहीं होगा जिस की अपील आदेश की अपील की तरह होती है

यदि किसी वाद पत्र को चूक के लिए खारिज किया जाता है तो वह आदेश डिक्री नहीं होगा

डिक्री के मुख्य बिंदु
एस. रत्ना बनाम सुरेंद्र को ए आई आर 2009 सुप्रीम कोर्ट 1089 के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने डिक्री के पांच आवश्यक तत्वों का उल्लेख किया

न्यायालय द्वारा न्याय निणर्यन
न्याय निर्णय की औपचारिक अभिव्यक्ति
औपचरिक अभिव्यक्ति किस वाद में है
वाद ग्रस्त सभी या किन्हीं विषय वस्तु के संबंध में अधिकारों का निर्धारण
अवधारण का निश्चित होना

डिक्री किन दशाओं में अंतिम बन जाती है

जब उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित की गई हो

जब उसके विरुद्ध कोई अपील दायर नहीं की गई हो
और अपील का समय समाप्त हो गया हो

जब वे सक्षम न्यायालय द्वारा पारित की गई हो जो मामले का पूर्ण रूप से निर्धारण कर सकती हो

डिक्री क्या हो सकती है डिक्री क्या नहीं हो सकती है
किसी वाद में समझौते के आधार पर दिया गया न्याय भी हो सकता है

डिक्री वाद दासन का आदेश डिग्री होगा

किसी वाद में वाद हेतु के कारण वाद को खारिज करने का आदेश डिक्री होगा

धारा 95 के तहत किसी योजना को भी निर्धारित करने का आदेश डिक्री होगा

डिक्री नहीं होगा
उत्तराधिकार प्रमाण पत्र
किसी मामले में निष्पादन की कार्यवाही में पारित आदेश नहीं होगा
अनुच्छेद 226 के अधीन उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश डिक्री नहीं होगा

(2) “decree” means the formal expression of an adjudication which, so far as regards the Court expressing it, conclusively determines the rights of the parties with regard to all or any of the matters in controversy in the suit and may be either preliminary or final. It shall be deemed to include the rejection of a plaint and the determination of any question within [* * *] section 144, but shall not include-

(a) any adjudication from which an appeal lies as an appeal from an order, or

(b) any order of dismissal for default.

Explanation .-A decree is preliminary when further proceedings have to be taken before the suit can be completely disposed of. It is final when such adjudication completely disposes of the suit. It may be partly preliminary and partly final;

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