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NEW DELHI :-भारतीय दंड संहिता की धारा 6 से 17 भाग 2
भारतीय दंड संहिता की धारा 6 से 52 A साधारण स्पष्टीकरण से संबंधित है इस अध्याय में संहिता में प्रयुक्त शब्दों का उल्लेख किया गया है यह अध्याय संपूर्ण दंड संहिता की कुंजी कहा जाता है

धारा 6. संहिता में प्रयुक्त परिभाषाओं को अपवादों के अध्ययन समझा जाएगा, धारा 6 का मुख्य उद्देश्य यह है कि अध्याय 4 के सामान्य अपवाद एवं सामान्य स्पष्टीकरण के बीच कोई भी विपरीत स्थिति पैदा नहीं हो क्योंकि अध्याय 4 के सामान्य अपवाद ही संपूर्ण संहिता को नियंत्रित करते हैं अन्त: सामान्य अपवादों एक जगह रखा गया है जिसे इनकी पुनरावृति ना हो या इनको दोहराया ना जा सके धारा 6 को संपूर्ण संहिता की कुंजी कहा जाता है

धारा 7. भारतीय दंड संहिता की धारा 7 साथ यह स्पष्ट करती है कि संहिता में स्पष्ट किए गए शब्दों एवं पदों का संपूर्ण अधिनियम में एक ही अर्थ निकाला जाएगा या एक ही अर्थ होगा

धारा 8. भारतीय दंड संहिता की धारा 8 यह निर्धारित करती है कि लिंग के अंतर्गत नर एवं नारी दोनों ही आते हैं

धारा 9. भारतीय दंड संहिता की धारा 9 वचन को निर्धारित करती है इसके अंतर्गत एक वचन एवं बहुवचन दोनों आते हैं

धारा 10. भारतीय दंड संहिता की धारा 10 पुरुष एवं स्त्री दोनों को परिभाषित करती है स्त्री एवं पुरुष किसी भी आयु का हो सकता है

धारा 11. यह व्यक्ति शब्द को परिभाषित करती है व्यक्ति शब्द के अंतर्गत कंपनी को भी शामिल किया गया

धारा 12. इस धारा के अंतर्गत कोई भी वर्ग या समुदाय सम्मिलित है

धारा 14. भारतीय दंड संहिता की धारा 14 सरकार के सेवक को परिभाषित करती है सरकार के सेवक को सरकार के अधीन माना जाता है जिसे सरकार के द्वारा नियोजित किया जाता है

धारा 17. भारतीय दंड संहिता की धारा 17 सरकार को परिभाषित करती है जिसके अंतर्गत केंद्र एवं राज्य सरकार को सम्मिलित किया गया है

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