भारतीय दंड संहिता में बल एवं अपराधिक बल का क्या प्रावधान है?

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भारतीय दंड संहिता की धारा 349, 350 बल एवं अपराधिक बल को परिभाषित करती है बल मूलतं अपराधिक बल ही है बल स्वतंत्र रूप से दंडनीय नहीं होता है अपराधिक बल दण्डनीये हो जाता है

बल क्या है?

बल एक ब्राहा कारक है जो किसी वस्तु की विरामवस्था या सरल रेखा में एक समान गति की अवस्था को परिवर्तित कर सकता है जैसे खेल के मैदान में खिलाडी के द्वारा गेंद को फेंकने पर गेंद की गति को तेज़ कर देना वहीं दूसरी ओर बल्ले से मारने पर गेंद की गति एवं दिशा दोनों को परिवर्तित कर देना एवं अन्य खिलाड़ी द्वारा गेंद को पकड़कर गेंद की गति को रोक कर देना इसके अतिरिक्त लगाकर किसी वस्तु की आकृति एवं आकार दोनों को बदला जा सकता है जैसे टमाटर को हथेली से दबाने पर पिचक जाना इस तरह बल लगाकर वस्तु के आकार एवं आकृति दोनों को बदला जा सकता है

बल के मुख्य तत्व

भारतीय दंड संहिता धारा 349 में बल के मुख्य तत्व निम्न है

  • एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति के शरीर पर बल प्रयोग करता है तब कहा जाएगा जब
  • दूसरे व्यक्ति के शरीर में गति गति परिवर्तन या गति हीनता कर दे
  • किसी पदार्थ या वस्तु में किस प्रकार गति गति परिवर्तन या गतिहीनता पैदा करें जिस वजह से पदार्थ या वस्तु दूसरे व्यक्ति से स्पर्श हो जाए या उसके शरीर से जा लगे
  • कोई ऐसी चीज जिसे दूसरे व्यक्ति ने पहने हुआ है ले जा रहा है या किसी भी ऐसी चीज से जो इस प्रकार स्थित है कि उसके स्पर्श से उस दूसरे व्यक्ति की संवेदन शक्ति पर प्रभाव पड़ता है
  1. अपनी निजी शक्ति द्वारा
  2. किसी पदार्थ के द्वारा
  3. किसी जीव जंतु के उत्प्रेरण द्वारा

अपराधिक बल क्या है?

भारतीय दंड संहिता की धारा 350 अपराधिक बल को परिभाषित करती है सामान्यता अपराधिक बल बल ही होता है जो व्यक्ति की सम्मति नहीं होने पर उसको अपराधिक बना देता है

अपराधिक बल के मुख्य तत्व

अपराधिक बल –

जो कोई

  • किसी व्यक्ति पर उस व्यक्ति की  सम्मति के बिना बल का प्रयोग
  • किसी अपराध को करने के लिए
  • उस व्यक्ति को जिस पर बल का प्रयोग किया जाता है क्षति भय या क्षोभ बल के प्रयोग कारित करने के आशय के या संभाव्य कारित करेगा

अपराधिक बल धारा 350 की शर्तें :-

  • किसी व्यक्ति के विरुद्ध साशय बल का प्रयोग
  • ऐसे बल का प्रयोग उस व्यक्ति की सम्मति के बिना किया गया है
  • बल प्रयोग अपराध करने के लिए किया गया हो

जिस व्यक्ति के विरुद्ध बल प्रयोग होता है उसे है उसे क्षति भय, क्षोभ कारित हो जाए जैसे य नदी के किनारे व्यक्ति से बनी हुई एक नाव पर बैठा है क रस्सी को खोल देता है तथा नाव को साशय बहा देता है यहाँ क ने य पर साशय बल का प्रयोग किया है यदि क ने यह कार्य य की सम्मति के बिना कोई अपराध करने का आशय रखते हुए या संभाव्य है जानते हुए किया है कि ऐसे प्रयोग से य को क्षति भय , क्षोभ होगा तो क ने य पर अपराधिक क प्रयोग किया है अपराधिक बन का प्रयोग किया है

अपराधिक बल की सजा

किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति पर बल का प्रयोग खतरे में डालने के लिए किया जाता है जिससे व्यक्ति को क्षति भय , क्षोभ कारित हो तो ऐसे व्यक्ति को भारतीय दंड संहिता की धारा 352 अभियुक्त को तीन मास का कारावास 500 जुर्माना दोनों से दंडित करने का प्रावधान करती है |

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