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NEW DELHI :-मुख्य न्यायिक परीक्षा में एफ आई आर से सम्बंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं ये लेख परीक्षा के लिए उपयोगी साबित होगा लेख को लेखक ने परीक्षा के प्रारूप के अनुसार लिखा है

संज्ञेय अपराध के संदर्भ में पुलिस अधिकारियों को दी गई प्रथम इत्तला ही एफ आई आर कहीं जा सकती है जिसे हिंदी में प्रथम सूचना रिपोर्ट और अंग्रेजी में इसे फर्स्ट इनफॉरमेशन रिपोर्ट तथा उर्दू में इसे रपट इब्तेदाई कहा करते हैं

प्रथम सूचना रिपोर्ट का उद्देश्य

प्रथम सूचना रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य पुलिस अधिकारी को अपराध से परिचित करवाना एवं अन्वेषण जैसी कार्यवाही की दिशा में प्रयास करना है

प्रथम सूचना रिपोर्ट को संहिता में कहीं परिभाषित नहीं किया गया है किंतु उसके संबंध में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 154 में प्रावधान किया गया है यह तीनों खंडों में विभाजित की गई है

पहला खंड

धारा 154 का उपखंड (1) में यह प्रावधान किया गया है कि यदि किसी संज्ञेय अपराध के किए जाने की प्रत्येक इत्तला पुलिस थाने के भार साधक अधिकारी को यदि मौखिक दी गई है तो उसके निर्देश अनुसार लेख बुध कर ली जाएगी और इत्तला देने वाले व्यक्ति को पढ़कर सुनाई जाएगी और यदि ऐसी लिखित रूप में दी गई है तो उस व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित की जाएगी जो उसे दे रहा है और उसका सार ऐसी पुस्तक में जो अधिकारी द्वारा ऐसे रूप में रखी जाएगी जिसे राज्य सरकार निमित्त करें

धारा 154 (1) 2013 में अपराधिक विधि संशोधन द्वारा इसमें एक परंतु जोड़ा गया है जिसमें यह कहा गया है कि यदि कोई अपराध स्त्री के विरूद्ध आईपीसी की धारा 326 A, 326 B, 354 (A, B, C, D ) 376( A, B, C, D, E ), 509 के अधीन अपराध किए जाने किए जाने का प्रयत्न हो और इत्तला किसी महिला के द्वारा दी जाती है तो ऐसी इत्तला को किसी महिला पुलिस अधिकारी या किसी महिला अधिकारी द्वारा अभिलिखित किया जाएगा

धारा 154 के दूसरे परन्तुक में प्रावधान किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति जिसके विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (A, B, C, D ) 376( A, B, C, D, E ), 509 के अधीन अपराध किए जाने या प्रयत्न किए किया गया है तो यदि व्यक्ति अस्थाई या स्थाई रूप से मानसिक व शारीरिक रूप से निशक्त है तो ऐसी इत्तला अधिकारी उसके निवास स्थान पर उस व्यक्ति के विकल्पों पर किसी सुगम स्थान पर दुकानों या विशेष प्रबंध की उपस्थिति में की जाएगी

ऐसी लेखन की वीडियो फिल्म तैयार की जाएगी पुलिस अधिकारी द्वारा धारा 164 (5) (क ) के अधीन न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा उस व्यक्ति का कथन यथासंभव अभिलिखत कराएगा

धारा 154 (2) के अनुसार उपधारा (1) के अधीन अभिलिखित इत्तला की प्रतिलिपि इत्तला देने वाले को निशुल्क दी जाएगी

धारा 154 (3) यदि कोई व्यक्ति थाने के भार साधक अधिकारी इत्तला लिखने से इनकार करता है तो वह ऐसी इत्तला का सार लिखित रूप में या डाक द्वारा डाक द्वारा सम्बुद्ध पुलिस अधीक्षक को भेज सकता है और यदि उसका यह समाधान होता है कि से किसी संज्ञेय अपराध का किया जाना प्रकट होता है कि वह स्वयं मामले का अन्वेषण करने (धारा 136)याअधीनस्थ किसी पुलिस अधिकारी को अन्वेषण करने का निर्देश देगा और उस अधिकारी को इस संबंध में पुलिस थाने के भार साधक अधिकारी की सभी शक्तियां प्राप्त होगी

प्रथम सूचना रिपोर्ट के आवश्यक तत्व

  • प्रथम सूचना रिपोर्ट संज्ञेय अपराधों के संबंध में की जाती है अर्थात सूचना ऐसी हों जो संज्ञेय अपराध का किया जाना प्रकट करे
  • प्रथम सूचना रिपोर्ट थाने के भार साधक अधिकारी को की गई हो या उससे अधीनस्थ अधिकारी को ऐसे कार्य करने का भार मिला हो
  • यदि अपराध किसी महिला से संबंधित है तो रिपोर्ट किसी महिला पुलिस अधिकारी द्वारा या अन्य महिला अधिकारी द्वारा लिखित की जाएगी
  • ऐसी सूचना लिखित या मौखिक किसी भी रूप में हो सकती है
  • प्रथम सूचना रिपोर्ट तीन प्रितियों में होनी चाहिए
  • प्रथम सूचना रिपोर्ट किसी भी व्यक्ति द्वारा दी जा सकती है
  • प्रथम सूचना रिपोर्ट स्पष्ट व निश्चित होनी चाहिए
  • प्रथम सूचना रिपोर्ट में अपराधी या गवाहों को नामित किया जाना ज़रूरी नहीं है
  • प्रथम सूचना रिपोर्ट पुलिस फॉर्म नंबर 341 के फॉर्मेट में लिखी जाएगी
  • प्रथम सूचना रिपोर्ट की एक प्रति रिपोर्ट करने वाले को तत्काल निशुल्क दी जाएंगी

ACCORDING TO CODE

154. Information in cognisable cases. – (1) Every information relating to the commission of a cognisable offence, if given orally to an officer-in-charge of a police station, shall be reduced to writing by him or under his direction, and be read over to the informant; and every such information, whether given in writing or reduced to writing as aforesaid, shall be signed by the person giving it, and the substance thereof shall be entered in a book to be kept by such officer in such form as the State Government may prescribe in this behalf.

[Provided that if the information is given by the woman against whom an offence under section 326A, section 326B, section 354, section 354A, section 354B, section 354C, section 354D, section 376, [section 376A, section 376AB, section 376B, section 376C, section 376D, section 376DA, section 376DB,] section 376E or section 509 of the Indian Penal Code is alleged to have been committed or attempted, then such information shall be recorded, by a woman police officer or any woman officer:

Provided further that-

(a) in the event that the person against whom an offence under section 354, section 354A, section 354B, section 354C, section 354D, section 376, [section 376A, section 376AB, section 376B, section 376C, section 376D, section 376DA, section 376DB,] section 376E or section 509 of the Indian Penal Code is alleged to have been committed or attempted, is temporarily or permanently mentally or physically disabled, then such information shall be recorded by a police officer, at the residence of the person seeking to report such offence or at a convenient place of such person’s choice, in the presence of an interpreter or a special educator, as the case may be;

(b) the recording of such information shall be video-graphed;

(c) the police officer shall get the statement of the person recorded by a Judicial Magistrate under clause (a) of sub-section (5A) of section 164 as soon as possible.]

(2) A copy of the information as recorded under sub-section (1) shall be given forthwith, free of cost, to the informant.

(3) Any person aggrieved by a refusal on the part of an officer-in-charge of a police station to record the information referred to in sub-section (1) may send the substance of such information, in writing and by post, to the Superintendent of Police concerned who, if satisfied that such information discloses the commission of a cognisable offence, shall either investigate the case himself or direct an investigation to be made by any police officer subordinate to him, in the manner provided by this Code, and such officer shall have all the powers of an officer-in-charge of the police station in relation to that offence.

155. Information as to non-cognisable cases and investigation of such cases. – (1) When information is given to an officer-in-charge of a police station of the commission within the limits of such station of a non-cognisable offence, he shall enter or cause to be entered the substance of the information in a book to be kept by such officer in such form as the State Government may prescribe in this behalf, and refer the informant to the Magistrate.

(2) No police officer shall investigate a non-cognisable case without the order of a Magistrate having power to try such case or commit the case for trial.

(3) Any police officer receiving such order may exercise the same powers in respect of the investigation (except the power to arrest without warrant) as an officer-in-charge of a police station may exercise in a cognisable case.

(4) Where a case relates to two or more offences of which at least one is cognisable, the case shall be deemed to be a cognisable case, notwithstanding that the other offences are non-cognisable.

प्रथम सूचना रिपोर्ट का महत्व

यदि प्रथम सूचना रिपोर्ट परिवादी या व्यक्ति पक्षकार ने किया है तो वे अभियोजन साक्षी होने की वजह से धारा 145 व 157 का प्रयोग करेगा

यदि एफ आई आर अभियुक्त ने लिखवाई है तो वह अभियोजन साक्ष्य नहीं होता है इस कारण धारा 145 157 का प्रयोग नहीं करेगा वह केवल धारा 21 के रूप में धारा 27 घटना की जानकारी के रूप में प्रयोग करेगा

प्रथम सूचना रिपोर्ट का साक्षिक मूल्य क्या होता है

एफ आई आर मौलिक साक्ष्य नहीं माना जाता है इस कारण यह लोक दस्तावेज नहीं माना जाता है

साक्ष्य अधिनियमकी धारा 80 में ऐसे दस्तावेज की सत्यता की धारणा नहीं की जाती है इसे मौखिक साक्ष्य द्वारा साबित नहीं किया जाता है

साक्ष्य अधिनियम की कुछ धाराएं प्रथम सूचना रिपोर्ट का साक्षिक महत्व बताती हैं जो निम्नलिखित हैं :-

  • साक्ष्य अधिनियम की धारा 8 के अधीन आचरण से संबंधित होने के कारण सुसंगत हों सकती है
  • साक्ष्य अधिनियम की धारा 11 के अधीन अपराधी की मौजूदगी और ग़ैर मौजूदगी को दर्शित करने के हेतु सुसंगत हों सकती है
  • साक्ष्य अधिनियम की धारा 32 (1) के अधीन यदि सूचना दाता की मृत्यु हों जाती है तो यह मृत्युकालीन कथन के रूप में सुंसगत साबित हो सकती है यदि कथन मृत्यु के कारण या ऐसी परिस्थितियों का वर्णन करती है
  • साक्ष्य अधिनियम की धारा 145, 155, 157 के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट के प्रयोग का साक्ष्य के खंडन या पुष्टी के लिए प्रयोग किया जाता है
  • यदि प्रथम सूचना रिपोर्ट अभियुक्त ने स्वयं लिखवाई है तो वह साक्ष्य अधिनियम की धारा 25, 26 के अधीन संस्वीकृति नहीं मानी जाती है
  • प्रथम सूचना रिपोर्ट का साक्षिक मूल्य ना होते हुए भी उपरोक्त दिये गये तथ्यों के आधार पर इसके मूल्य को नहीं नाकारा जा सकता है

मल्टीपल एफ आई आर तथा क्रॉस एफ.आई.आर

यदि एक ही मामले में एक से अधिक एफ.आई.आर एक ही पक्ष कार की ओर से या विरोधी पक्ष का की तरफ से एक दूसरे पर एफ आई आर हो तब यह नियम है कि यदि एक ही एफ आई आर से अन्वेषण करके प्रक्रिया की जा सकती है तो अन्य एफ आई आर की आवश्यकता नहीं है ऐसे मामले में सामान्यता हाई कोर्ट में दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 में आवेदन करके एफ आई आर को रद्द किया जा सकता है

इसके लिए आवश्यक है कि सभी एफ आई आर में एक ही प्रकार के तथ्य हों अगर ऐसा नहीं है तो रिपोर्ट के तथ्य अलग अलग हैं तो एफ आई आर रद्द नहीं किया जा सकता है एक ही मामले में एक से ज्यादा एफ आई आर को मल्टीपल एफ आई आर कहा जा सकता है

मुख्य न्यायिक परीक्षा में एफ आई आर से सम्बंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं ये लेख परीक्षा के लिए उपयोगी साबित होगा

 

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