राज्य की कार्यपालिका

SAJMA ALI

NEW DELHI :-भारत में ऐसी संसदीय शासन व्यवस्था है जिसमें एक कार्यपालिका प्रधान राज्यपाल होता है तथा उसकी सलाह पर मुख्यमंत्री तथा मंत्री परिषद व्यवस्थापिका अर्थात विधानमंडल के प्रति उत्तरदाई होती है

राज्यपाल

राज्य के समस्त कार्यपालिका की शक्तियां राज्यपाल में निहित होती है तथा राज्य का पूरा शासन भी राज्यपाल के नाम से ही चलाया जाता है प्रत्येक राज्य में एक राज्यपाल होता है लेकिन आवश्यकता पड़ने पर एक ही राज्यपाल को एक से अधिक राज्यों का एक ही समय में राज्यपाल बनाया जा सकता है

1956 में यह व्यवस्था की गई कि 1 से अधिक राज्यों में जब एक ही व्यक्ति राज्यपाल के रूप में कार्य करता है जिस राज्य में जब कार्य करता है वही का व्यवस्थापिका की सलाह पर कार्य करता है

अनुच्छेद 153 के अनुसार

  • एक राज्य का राज्यपाल होगा
  • एक ही व्यक्ति को एक से अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है

योग्यता

  • भारत का नागरिक हो
  • 35 वर्ष की आयु हो
  • लाभ के पद पर ना हो

राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर कार्य करते हैं

कार्यकाल

यह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत होता है परंतु सामान्यता इनका कार्यकाल 5 वर्ष होता है इससे पहले यह अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को दे सकते हैं

वेतन

राज्यपाल का वेतन देश के प्रधानमंत्री के वेतन से ज्यादा होता है राज्यों के राज्यपाल का महीने का वेतन ₹350000 20% की कटौती के बाद यह ₹245000 मिलता है

कार्य व शक्तियां

विधायी कार्य
प्रशासनिक कार्य
न्यायिक कार्य

विधायी कार्य

राज्यपाल विधानमंडल का अंग होता है उसके हस्ताक्षर के कानून नहीं बन सकता है

यदि विधानमंडल में सत्र न हो तो अनुच्छेद 213 के अनुसार राज्यपाल अध्यादेश जारी कर सकता है

सजा परिहार के तरीके में बदलाव कर सकता है

राज्य विधानमंडल से पारित किसी विधेयक को
राज्यपाल राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए आरक्षित कर सकता है

अनुच्छेद 200 के अंतर्गत उच्च न्यायालय की शक्तियों में कमी या वृद्धि करने वाले किसी विधेयक को वह अनिवार्य रूप से आरक्षित करेगा

प्रशासनिक कार्य
अनुच्छेद 356 के अंतर्गत राज्यपाल किसी राज्य विशेष में राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश कर सकता है

राज्य स्तर के पदों जैसे – महाधिवक्ता, जिला न्यायाधीश, राज्य लोक सेवा आयोग, राज्य वित्त आयोग राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य स्तर के अन्य आयोगों के अध्यक्ष और अन्य सदस्य राज्य स्तरीय विद्यालय के कुलपतियों मुख्यमंत्रियों मंत्रिपरिषद के सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल के द्वारा की जाती है

न्यायिक शक्तियां

मृत्युदंड को छोड़कर अन्य किसी भी दण्ड को राज्यपाल क्षमा परिहार लघुपरण निलंबन कर सकता है
राष्ट्रपति और राज्यपाल की शक्तियों का न्यायिक पुनर्विलोकन हो सकता है

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