भारत में वसीयत करना एक आम है सम्पत्ति को अंतरित करने के लिये वसीयत किया जाता है इसको अंग्रेजी में विल कहा जाता है वसीयत के दस्तावेज वैधानिक दस्तावेज़ होते हैं जो किसी सम्पत्ति के स्वामी द्वारा उसके मर जाने पर सम्पत्ति के उत्तराधिकार को तय करते हैं विधि सलाहकार द्वारा वसीयत से जुड़े सवाल औरकुछ सवालों के ज़वाब ये हैं,

क्या चल और अचल सम्पत्ति की जा सकती है वसीयत?

          हाँ, वसीयत चल व अचल दोनों सम्पत्तियों की, की जा सकती है अचल सम्पत्ति ( भूमि, मकान, जो भी सम्पत्ति भूमि से जुड़ी हो ) और चल सम्पत्ति ( गाड़ी, पशु, लॉकर में रखा कैश, आदि, जो जमीन से ना जुड़ा हो ) दोनों की वसीयत की जा सकती है |

क्या है वसीयत करने की योग्यता?

भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925 की धारा 59
के अनुसार:
1-कोई भी स्वास्थ्यचित वयस्क व्यक्ति
2-सम्पत्ति स्वयं अर्जित की गई हो
यदि कोई व्यक्ति स्वास्थ्यचित वयस्क है और उसके पास जो सम्पत्ति है उसने स्वयं अर्जित की है तो वह उस सम्पत्ति को वसीयत कर सकता है |

कोई व्यक्ति जिसको उन्मत्ता के दौरे बार बार आते हैं क्या वसीयत कर सकता है?

                                हाँ, ऐसे व्यक्ति जिस स्वस्थचित होगा उस समय वह अपनी संपत्ति को वसीयत कर सकता है। किसी भी तरह का नशा या धोखे से कराई गई वसीयत मान्य नहीं है |

क्या स्त्री द्वारा वसीयत की जा सकती है?

                                  हाँ, वसीयत को स्त्री पुरुष दोनों कर सकते हैं (भारतीय दण्ड संहिता धारा 11) दोनों में कोई भेद नहीं है केवल महत्व इस बात का है कि संपत्ति स्वयं द्वारा अर्जित होना चाहिए।

क्या वसीयत को वापस लिया जा सकता है, और कब निष्पादन पूर्ण होता है?

                                 वसीयत को वसीयतकर्ता के द्वारा किसी भी समय वापस भी ले सकता है। एक बार वसीयत करने के बाद यदि वह चाहे तो वसीयत का रिवोकेशन भी कर सकता है और अपने द्वारा की गई वसीयत को पुनः वापस ले सकता है। कोई भी वसीयत उस समय ही निष्पादित होती है जब उसे करने वाला व्यक्ति मृत्यु को प्राप्त हो कर लेता है। किसी भी वसीयत को करने वाले व्यक्ति के जीवित रहते उस व्यक्ति द्वारा की गयी वसीयत निष्पादित नहीं हो सकती।

क्या वसीयत का रजिस्ट्रेशन आवश्यक है?

                                भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम में वसीयत का रजिस्ट्रेशन या इसको नोटराइज करवाना आवश्यक नहीं बताया गया है। एक कागज का टुकड़ा भी वसीयत हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति अपनी अर्जित की गई संपत्ति को वसीयत करना चाहता है तो उस वसीयत करने वाले व्यक्ति के आशय को देखा जाता है यहां तक वसीयत में लिखे गए शब्दों पर भी कोई खास ध्यान नहीं दिए जाने का प्रावधान है। शब्द कैसे भी हो भाषा कैसी भी हो मूल विषय वसीयत को लिखने वाले का आशय स्पष्ट होना चाहिए। वसीयत में कोई संशय नहीं रहना चाहिए

क्या रजिस्टर्ड वसीयत उत्तराधिकारी पक्ष को मजबूत करती है?

                       हाँ, वैसे तो क़ानून में वसीयत के संबंध में कोई विशेष रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया का उल्लेख नहीं है और ना ही इसकी कोई बाध्यता है परंतु वसीयत का रजिस्ट्रेशन करवा लेना चाहिए। ऐसी परिस्थिति में मुकदमेबाजी से बचा जा सकता है, क्योंकि यहां पर उत्तराधिकारी पक्ष के पास यह तर्क हो जाता है कि जो वसीयत की गयी है वह संपत्ति को अर्जित करने वाले व्यक्ति ने लिखी है उसे सरकार द्वारा तय किए गए आदमी के पास जाकर हस्ताक्षर करवायी गयी है |

क्या हिन्दू और मुसलमानों में वसीयत अलग अलग तय की जाती है?

                      हाँ वसीयत पर्सनल लॉ भारतीय उत्तराधिकार पर्सनल लॉ के अंतर्गत आती है, हिन्दुओं के लिए हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम और मुसलमानों के लिए शरीयत का कानून है। हिन्दू लॉ में वसीयत हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के अंतर्गत उन लोगों की संपत्ति का बंटवारा किया जाता है जो व्यक्ति बगैर कोई वसीयत किए मर जाए । ऐसे व्यक्ति को निर्वसीयती कहा जाता है। कोई भी हिंदू व्यक्ति अपने द्वारा अर्जित की गई संपत्ति को जिसे चाहे उसे वसीयत कर सकता है। वह व्यक्ति अपनी पैतृक संपत्ति को वसीयत नहीं कर सकता है। जो संपत्ति उसके द्वारा अर्जित नहीं की गयी है

मुस्लिम लॉ ,मुस्लिम लॉ में वसीयत जैसा कोई विशेष प्रावधान नहीं है एक मुसलमान व्यक्ति को अपने द्वारा अर्जित संपत्ति को शरई तौर पर बंटवारा करने का आदेश है। मुस्लिम लॉ में भी एक तिहाई संपत्ति को वसीयत किया जा सकता है। शेष संपत्ति को शरीयत के अनुसार ही बांटा जाने का आदेश है।

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