क़ानून के अनुसार गिरफ्तारी किस तरह की जानी चाहिए

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भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता 1974 के उपबंध बताते हैं कि क़ानून के अनुसार गिरफ्तारी किस तरह की जानी चाहिए ,दण्ड प्रक्रिया सहिंता की धारा 46 गिरफ्तारी के बारे में उपबंध करती है कि जब किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है तो उस गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी के कर्तव्य और गिरफ्तार होने वाले व्यक्ति के क्या अधिकार होंगे और पुलिस अधिकारी उस व्यक्ति को किस तरीके से गिरफ्तार करके ले जाएगा

1- किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी व्यक्ति के शरीर को गिरफ्तार करने वाले व्यक्ति द्वारा वस्तुता छूकर अथवा उस व्यक्ति को परिरुद्ध करके की जाती है|

2- यदि किसी महिला को गिरफ्तार किया जाता है तो गिरफ़्तारी में मौखिक सूचना पर अभिरक्षा में उसके समपर्ण की उपधारणा की जाएगी जब तक पुलिस अधिकारी महिला ना हो परुष अधिकारी अभियुक्त महिला को नहीं गिरफ्तार करेगा |

3-यदि किसी अपराध का अभियुक्त गिरफ़्तारी से बचने के लिये किसी तरह का बल प्रयोग करने का प्रयास करता है या भागने का प्रयास करता है तो पुलिस अधिकारी गिरफ्तार करने के लिये आवश्यक साधनों का प्रयोग कर सकता है|

4- किसी भी महिला हो सूर्यास्त के बाद व सूर्योदय से पहले गिरफ्तार नहीं किया जाएगा जब तक कि परिस्थितियां अनुचित ना हों यदि मामले में गिरफ्तार किया जाना आवयश्क है तो मजिस्ट्रेट की अनुज्ञ पर महिला अधिकारी द्वारा गिरफ्तार किया जा सकता है|

5-कोई पुलिस अधिकारी किसी अभियुक्त को संपूर्ण भारत में पीछा करके गिरफ्तार कर सकता है|

6-कोई अभियुक्त पुलिस अभिरक्षा से भाग जाता है या किसी तरह छुड़ा लिया जाता है तो ऐसे व्यक्ति को कहीं से भी गिरफ्तार किया जा सकता है उसको गिरफ्तार करने के लिये वांरट की जरुरत नहीं होती है|

7-कैदियों को जेल से न्यायालय तक जाने के लिये या वापस आने के लिये हाथगड़ी का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए यदि मामला गंभीर अपराध वाला नहीं है|

उच्चतम न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि उपरोक्त दिशा निर्देशों का पालन नहीं किया जाता है तो पुलिस अधिकारी ना केवल विभागीय कार्यवाही के उत्तरदायी होगा बल्कि न्यायालय की अवमानना के लिये भी दण्डित किया जा सकता है|

मुख्य मामले में पुलिस को दिये गये दिशा निर्देश

दीलीप के बासु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य AIR 1997 SC के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी तथा निरोध में रखे गये व्यक्ति के सम्बन्ध में न्यूनतम संरक्षात्मक दिशा निर्देश जारी किये हैं-

पुलिस अधिकारी को अपने पद नाम और स्पष्ट नाम व पहचान के साथ वस्त्र धारण करना होगा|

पूछताछ करने वाले अधिकारी को पूछताछ के विवरण को एक रजिस्टर में लिखना होगा|

गिरफ्तारी का विवरण तथा गिरफ्तारी का ज्ञापन तैयार केरगा और जिस व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाएगा उस व्यक्ति के कुटुंब के सदस्य द्वारा ज्ञापन को हस्ताक्षरित कर वाया जाएगा यदि कुटुंब का सदस्य नहीं है तब उस क्षेत्र के प्रतिष्ठ या जाने माने व्यक्ति द्वारा गिरफ्तारी के ज्ञापन पर हस्ताक्षर करवाये जाएँ|

गिरफ्तार किये गये व्यक्ति की गिरफ्तारी का स्थान समय उसकी संसूचना को उसके नातेदार को देना होगा|

जहाँ गिरफ्तार किये गये व्यक्ति को रखा गया है वहां एक पुलिस डायरी रखी जाएगी उस डायरी में गिरफ्तार हुए व्यक्ति की संसूचना किसको दी गयी है उसका नाम मौजूद होगा साथ ही साथ उस डायरी में जिन पुलिस अधिकारीयों द्वारा गिरफ्तार किया गया है उनका विवरण भी डायरी में मौजूद होगा|

गिरफ्तार किये गये व्यक्ति के निवेदन पर उसका स्वस्थ परीक्षण करवाया जाएगा यदि उस व्यक्ति के शरीर पर चोट या घाव के निशान हैं तो उसका निरक्षण ज्ञापन पर पुलिस अधिकारी और गिरफ्तार व्यक्ति के हस्ताक्षर मौजूद होंगे |

गिरफ्तार व्यक्ति के गिरफ्तारी से संबंधित दस्तावेजों को क्षेत्र के मजिस्ट्रेट के पास उसके अभिलेख के लिये भेजा जाएगा|

गिरफ्तार व्यक्ति को निरोध के दौरान अपने वकील से मिलने का अधिकार है|

प्रत्येक जिला मुख्यालय द्वारा पुलिस नियंत्रण कक्ष की स्थापना की जाएगी|

 

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