क़ानून में महिला की गिरफ्तारी के उपबंध

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NEW DELH:
किसी महिला को कब कैसे गिरफ्तार किया जाए इन्हीं बिंदुओं को लागू करने के लिये क़ानून में महिला की गिरफ्तारी के उपबंध दिये गये हैं दण्ड प्रक्रिया संहिता अध्याय 5 गिरफ़्तारी से संबंधित है पुलिस अधिकारी व मजिस्ट्रेट को किसी व्यक्ति को गिरफ्तारी करने के अधिकार दिये गये हैं कुछ परिस्तिथियों में प्राइवेट व्यक्ति भी किसी को गिरफ्तार कर सकता है गिरफ्तारी वारण्ट या वारण्ट के बिना की जा सकती है पुरुष को किसी भी समय गिरफ्तार किया जा सकता है परन्तु किसी महिला को सूर्यास्त के बाद व सूर्योदय से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है जिसकी वज़ह से कुछ मामलों में अभियुक्त इसका अनुचित लाभ उठा लेते हैं अथवा कुछ परिस्तिथियों में पुलिस भी अनुचित रूप से गिरफ्तारियां कर लेती है

महिला की गिरफ्तारी और समय

दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 46 खण्ड 3 व 4 को पुनः स्थापित करते हुए संहिता में यह उपबंध किया गया कि कुछ अपवादात्मक परिस्थितियों को छोड़ कर कोई भी महिला सूर्यास्त के बाद व सूर्योदय से पहले गिरफ्तार नहीं की जाएगी क्षेत्रीये अधिकारिता रखने वाली महिला पुलिस अधिकारी लिखित रूप में ऐसे प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट से जिसके क्षेत्र अधिकार में अपराध का मामला घटित हुआ है कारण लिखत करके अनुमति लेगी की अपराधी का गिरफ्तार किया जाना उचित है |

क्या किसी महिला को पुरुष पुलिस अधिकारी गिरफ्तार कर सकता है?

सामान्य परिस्थितियों में महिला को पुरुष अधिकारी द्वारा गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है परन्तु परिस्थितियां अनुचित होने पर अपराधी महिला को गिरफ्तार किया जा सकता है इसी अपवादात्मक परिस्थिति से संबंधित मामला नोएडा में घटित हुआ जिसके तथ्य इस प्रकार हैं
राजकुमारी बनाम एस• एच •ओ • नोएडा 2003 SC के मामले में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि एक पुरुष व्यक्ति भी आवश्यक परिस्थितियों के कारण महिला को दिन में गिरफ्तार कर सकता है
इस मामले में पिटीशनर राजकुमारी का कहना था कि उसको रात में 1:30 पर गिरफ्तार किया गया था जबकि क्षेत्राधिकारी ने न्यायालय में शपथ पत्र दायर करके न्यायालय को कहा कि राजकुमारी को 5:30 पर गिरफ्तार किया गया था पिटीशनर के पास कथन को साबित करने के लिये संपोषक साक्ष्य नहीं था क्षेत्राधिकारी की गिरफ़्तारी को सही माना गया |

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