एनडीपीएस के तहत अधिकारियों को गई स्वीकृति मान्य नहीं : सुप्रीम कोर्ट

IQBAL

NEW DELHI :- सुप्रीम कोर्ट ने कन्हैया लाल बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया 2008 को पलट दिया जिसमें कहा गया था कि एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार करने वाला व्यक्ति पुलिस अधिकारी की श्रेणी में नहीं आता है उसके सामने की गई स्वीकृति मान्य है,
इस फैसले को 3 जजों की बेंच ने उलट दिया, 2013 में सुप्रीम कोर्ट में मामला आया सवाल था कि एनडीपीएस एक्ट के तहत जो ऑफिसर है वह पुलिस अधिकारी है या नहीं, दूसरा सवाल था ऑफिसर को की गई स्वीकृति मान्य है या नहीं,

न्यायमूर्ति रोहिंटन एफ। नरीमन, न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा की बेंच ने 29 अक्टूबर को एक निर्णय में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत एक “थाने के प्रभारी अधिकारी” की शक्तियों के साथ निवेश किए गए अधिकारियों को दिए गए बयान, अदालत में मुकदमे के दौरान सबूत के रूप में स्वीकार्य नहीं हैं,

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपी का एनडीपीएस एक्ट की धारा 67 के अधीन दिये गये बयान को नहीं माना जाएगा विचारण के दौरान एक बयान के आधार पर आरोपी व्यक्ति को दण्डित नहीं किया जाएगा|

ऐसी स्वीकृति इक़बालिया बयान स्वीकार योग्य नहीं है यह आरोपी व्यक्ति के मौलिक अधिकार अनुच्छेद 14 एवं अनुच्छेद 20(3) का उलंघन है जिसमें कहा गया है कि किसी व्यक्ति को अपने खिलाफ़ गवाही देने के लिये विवश नहीं किया जा सकता है,

साक्ष्य अधिनियम की धारा 25पुलिस अधिकारी के समक्ष संस्वीकृति से सम्बंधित है इस धारा के अधीन की गई संस्वीकृति कोर्ट में मान्य नहीं है,

इसलिये कोर्ट ने एनडीपीएस एक्ट के तहत ऑफिसर को की गई संस्वीकृति को पुलिस ऑफिसर के समक्ष की गई संस्वीकर्ती माना है जो कोर्ट में स्वीकार योग्य नहीं है,

अधिनियम की धाराओं का हिंदी रूपांतर :-
एनडीपीएस एक्ट (मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम)-

धारा 53- एक पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी की शक्तियों के साथ कुछ विभागों के अधिकारियों को निवेश करने की शक्ति। –

(1) केंद्र सरकार, राज्य सरकार के परामर्श के बाद, आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना द्वारा, केंद्रीय उत्पाद शुल्क, नशीले पदार्थों, सीमा शुल्क, राजस्व खुफिया विभाग [या केंद्र सरकार के किसी अन्य विभाग के किसी भी अधिकारी को निवेश कर सकती है। इस अधिनियम के तहत अपराधों की जांच के लिए अर्ध-सैन्य बल या सशस्त्र बल] या ऐसे अधिकारियों की किसी भी वर्ग के साथ एक थाने के प्रभारी अधिकारी की शक्तियां शामिल हैं।

(2) राज्य सरकार, आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना द्वारा, ड्रग्स नियंत्रण विभाग, राजस्व या उत्पाद शुल्क 2 [या किसी अन्य विभाग] के किसी भी अधिकारी को निवेश कर सकती है या किसी अधिकारी की शक्तियों के साथ ऐसे अधिकारियों का कोई वर्ग -इस अधिनियम के तहत अपराधों की जांच के लिए एक थाने का प्रभारी।

धारा 67 – सूचना के लिए कॉल करने की शक्ति, आदि – किसी भी अधिकारी को धारा 42 में संदर्भित किया जाता है, जो केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में अधिकृत है, किसी भी प्रावधान के उल्लंघन के संबंध में किसी भी जांच के दौरान। अधिनियम, –

(ए) किसी भी व्यक्ति से स्वयं को संतुष्ट करने के उद्देश्य से जानकारी के लिए कॉल करें कि क्या इस अधिनियम के प्रावधानों या किसी नियम या आदेश के तहत कोई उल्लंघन हुआ है;

(ख) किसी भी व्यक्ति को पूछताछ के लिए उपयोगी या प्रासंगिक किसी भी दस्तावेज या चीज का उत्पादन करने या देने की आवश्यकता है;

(c) मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित किसी भी व्यक्ति की जाँच करें।

साक्ष्य अधिनियम की धारा 25 -पुलिस अधिकारी के सामने स्वीकार नहीं किया जाएगा। – पुलिस अधिकारी के लिए किया गया कोई भी बयान किसी भी अपराध के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ साबित नहीं होगा। – पुलिस अधिकारी के लिए किया गया कोई भी बयान किसी भी अपराध के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ साबित नहीं होगा। । “

संविधान की अनुच्छेद 20(3) किसी भी अपराध के आरोपी किसी व्यक्ति को खुद के खिलाफ गवाह बनने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा

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