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NEW DELHI :-विश्व में पहला पेटेंट 1474 वेनिस में प्रदान किया गया था इसके बाद 1624 में इंग्लैंड में एकाधिकार का विधान बनाया था तत्पश्चात 1791 फ्रांस में पेटेंट कानून बनाया गया इसके बाद कई यूरोपीय देशों ने 1800 -82 के बीच पेटेंट कानून बनाएं

1883 में पेरिस में एक वैश्विक समझौता हुआ इसमें आज की तीसरी दुनिया शामिल नहीं थी इसके बाद ब्रूसेल्स में 1900 में, वॉशिंगटन में 1911 में हेग, 1925 में लंदन में 1934 में लिब्सन 1958 में स्टॉकहोम में 1967 में आयोजित हुए

गुलाम भारत में अंग्रेजों ने 1911 में पेटेंट एवं डिजाइन अधिनियम बनाया इस अधिनियम में उत्पात पेटेंट की व्यवस्था की गई

इसके एक साल बाद ही मुंबई प्रांत में मेडिकल परिषद का कानून बनाया गया और 1916 में केंद्रीय स्तर पर इंजन मेडिकल डिग्रीज़ एक्ट साथ बनाया गया था इस प्रकार एक ओर एलोपैथिक की शिक्षा एवं शिक्षा एवं चिकित्सा अभ्यास को कानूनी तौर पर किया गया तो दूसरी ओर भारत में एलोपैथी दवाओं के उत्पादन, व्यापार, आयात पर नियंत्रण की व्यवस्था की गई

आजादी के 23 साल बाद 1970 में नया पेटेंट कानून बनाया गया जिसमें उत्पाद पेटेंट को खत्म कर दिया गया इसके बाद से भारत में तेजी से एलोपैथिक दवा उद्योग बड़ा और भारत एक युद्ध निर्यातक देश बन गया भारत एक जेनेरिक मेडिसिन का प्रमुख खिलाड़ी है भारत देश में मेडिसिन बनाने में कम लागत आती है

अलग अलग देशों के पेटेंट और ट्रेडमार्क के विवरण को को इकट्ठा करने के उद्देश्य से 1994 के डब्ल्यूटीओ( WTO) सम्मेलन की व्यवस्था की गई सारी दुनिया में पेटेंट का एक ही क़ानून हो साम्रज्यवाद के नए रूप सार्वभौमिक उदघोषणा है सभी देशों को इस प्रकार से अपनी संप्रभुता के संकुचन को स्वीकार करना पड़ा है

1999 में भारत सरकार ने 1970 के अधिनियम में पहला संशोधन कर विपणन विशेषाधिकार का प्रावधान किया है इसके तहत यदि किसी भी दवा निर्माता देश में उत्पाद पेटेंट प्राप्त है तो उसके लिए मेल बॉक्स व्यवस्था स्थापित करनी होगी और प्राप्त आवेदनों पर विचार विमर्श करना होगा

साल 2002 में कानून ने पुनः संशोधन किया गया और 64 नए उपबंध जुड़े गए जिनका संबंध पेटेंटवादी एवं विशेष अधिकार के वादों से ही है

इसके अगले वर्ष लोकसभा में नया विधेयक लाया गया जो 2004 में लोकसभा भंग हो जाने के कारण स्वत: निरस्त हो गया गत वर्ष के अंत में 26 दिसंबर 2004 को सरकार ने अध्यादेश जारी किया

यह अध्यादेश विश्व व्यापार संगठन WTO के ट्रिप्स समझौते के अनुपालन में लाया गया अगले वर्ष 2005 में इस अध्यादेश की जगह को लोकसभा ने 22 मार्च को राज्यसभा में 23 मार्च को संशोधन के साथ विधेयक पेश किया गया था इस अधिनियम को पेटेंट संशोधन अधिनियम 2005 नाम दिया गया है,

भारत में पेटेंट एंड कॉपीराइट का कानून आज़ादी के पहले से प्रचलित रहा है आजाद भारत में 1970 में अलग क़ानून लाया गया मगर पेटेंट एंड कॉपीराइट की दुनिया में भारत में क्रांति 1996 में अमेरिका से नीम बासमती एंड हल्दी के पेटेंट को वापस लिया गया इसके बाद भारत में बौद्धिक सम्पदा के विकास एवं प्रबंधन के लिये सरकार ने जागरूक किया

वर्तमान भारत में पेटेंट एंड कॉपीराइट के लिये हज़ारों आवेदन किये जाते हैं परन्तु भारत उत्पाद पेटेंट में अभी भी
विकसित देशों से पिछड़ा हुआ है इसका कारण यही है कि सरकार को पेटेंट एंड कॉपीराइट के प्रोसीजर को आसान एवं जागरूकता अभियान चलाने की आवयशकता है |

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