HAMNA

NEW DELHI :-विश्व में अनेक देशों में अनेक विषयों पर अपनी कला एवं अलग अलग तरह का ज्ञान और सोच रखने वाले लोगों की तादाद बहुत है लोग अपने द्वारा किसी नयी वस्तु को बनाते हैं या किसी विषय पर नयी रिसर्च करते हैं या किसी मार्क को बनाते हैं, लोगों द्वारा किया गया ऐसा कार्य उनकी सम्पत्ति होता है |इन्हीं विषयों को ध्यान में रखते हुए सभी देशों ने अपने नागरिकों के कार्यों को सुरक्षा प्रदान करने के लिये अंतराष्ट्रीय स्तर पर समझौतों को बनाया है, जिससे प्रत्येक देश के नागरिक को उसके कार्य को सुरक्षा प्रदान हो| इसी विषय पर आज का लेख आधारित है ये लेख यूपीएससी परीक्षा मैंस के पेपर में शार्ट क्वेश्चन के लिये उपयुक्त साबित होगा|

पेटेंट एंड कॉपीराइट पर इंटरनेशनल कन्वेंशन

  • Paris convention पेरिस कन्वेंशन
  • Patent co- operation treaty(पेटेंट को-ऑपरेशन ट्रीटी)
  • डब्ल्यू टी ओ- ट्रिप्स (WTO TRIPs)
  • Harmonization of CBD and TRIPs
  • Paris Convention (परिस कन्वेंशन)
    परिस कन्वेंशन 1883 में आयोजित किया गया इसे अंतिम बार 1967 में रिवाइज्ड किया गया था यह कन्वेंशन सभी पक्षकारों के औद्योगिक सम्पदा पर लागू होता है जैसे पेटेंट ट्रेडमार्क एवं डिजाइन |

कन्वेंशन के सभी पक्षकारों को वही संरक्षण प्राप्त होगा जो अपने देश में किसी अविष्कारकर्ता को प्रदान किया जाता है

कन्वेंशन के पक्षकार किसी देश में यदि पेटेंट हेतु आवेदन किया जाता है तो 12 महीने के अंदर पेटेंट एवं 6 महीने के अंदर ट्रेडमार्क एवं डिजाइन के संरक्षण हेतु कन्वेंशन के अन्य पक्षकारों के यहां भी समान संरक्षण हेतु आवेदन किया जा सकता है एवं सभी पक्षकरों को सामान संरक्षण प्राप्त होगा

कन्वेंशन के द्वारा सभी पक्षकारों हेतु कुछ सामन्य रूल निश्चित किये हैं जिसका वह पालन करेंगे,

भारत भी 7 दिसंबर 1998 से इस कन्वेंशन का सदस्य है तो भारत भी सभी अन्य पक्षकारों को संरक्षण प्रदान करेगा

  • पेटेंट को-ऑपरेशन ट्रीटी (PCT)

यह कन्वेंशन 1970 में आयोजित किया गया था यह कन्वेंशन पेरिस कन्वेंशन के पक्षकारों के लिये भी खुला हुआ है जो सभी पक्षकारों को लागू होता है

इसमें इंटरनेशनल पेटेंट एप्लीकेशन का प्रावधान किया गया है जो सभी पक्षकारों को एप्लीकेशन देने की सुविधा प्रदान करता है

इसमें एप्लीकेशन (नेशनल पेटेंट ऑफिस) राष्ट्रीय पेटेंट कार्यालय में या उसके पास विकल्प होता है कि वह WIPO (जनेवा) के माध्यम से एप्लीकेशन इन्वेंटर अविष्कार कर्ता द्वारा दायर किया जाए

अविष्कारकर्ता प्रार्थी जिन देशों में अपने उत्पाद का संरक्षण चाहता है प्रार्थना पत्र में उन देशों के नाम प्रगत करेगा

इसमें इंटरनेशनल सर्च का प्रावधान किया गया है इंटरनेशनल एप्लीकेशन और इंटरनेशनल सर्च की रिपोर्ट WIPO के इंटरनेशनल ब्यूरो के द्वारा प्रकाशित किया जाती है जिससे आविष्कारकर्ता को अपने उत्पाद को अलग पहचान दिलाने में आसानी होती है

  • पेटेंट को-ऑपरेशन ट्रीटी (PCT) के लाभ

इससे समय की बचत होती है हर देश में लोकल एजेंट को नियुक्त करने अनुवाद करने एवं राष्ट्रीय स्तर पर हर देश में फीस जमा करने से मुक्ति मिलती है

पेटेंट ऑफिस के सर्च एवं एग्जामिनेशन का कार्य कम हो जाता है

इंटरनेशनल ब्यूरो के रिपोर्ट प्रकाशन के बाद थर्ड पार्टी उसके बारे में अपनी राय बनाने हेतु और अच्छी स्थिति में होते हैं

भारत 7 दिसंबर 1998 कोपेटेंट को-ऑपरेशन ट्रीटी (PCT) का सदस्य बन गया था भारत भी अन्य देशों के आविष्कारकर्ताओं को अपने देश में संरक्षण प्रदान करेगा

  • WTO TRIPs (डब्ल्यूटीओ- ट्रिप्स)

यह कन्वेंशन 1 जनवरी 1995 को आयोजित किया गया
यह समझौते प्रत्येक सदस्य द्वारा पेटेंट सुरक्षा के न्यूनतम मानक तय करता है

न्यूनतम अंतराष्ट्रीय स्तर को आई पी आर के क्षेत्र में निर्धारित करता है

यह न्यूनतम अंतराष्ट्रीय स्तर डब्ल्यू टी ओ अग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने वाले देशों द्वारा प्रदान किया जाएगा

यह वी आई पी ओ के मुख्य अग्रीमेंट एवं कन्वेन्शन के साथ सामंजय के न्यूनतम स्तर निर्धारित करेगा
(बर्न कॉन्वेंसन एवं पेरिस कान्वेंसन )

डब्ल्यू टी ओ को कुछ मामलों में बर्न कॉन्वेंसन एवं पेरिस कान्वेंसन के नाम से भी जाना जाता है

यह बहुपक्षीय समझौता बहुत ही व्यापक समझौता है

Enforcement :- प्रावधानों के दूसरे मुख्य सेट बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के इंफोर्समेंट के लिए घरेलू उपचारों से संबंधित है यह समझौता सभी आईपीआर इन्फोर्स्मेंट प्रक्रियाओ के लागू सिद्धांतों को अलग कर देता है इसके अलावा यह नागरिक और प्रशासनिक उपायों पर प्रावधानों सीमा, उपायों और आपराधिक प्रक्रियाओ से संबंधित विशेष आवश्यकताओं में शामिल है जो अपने अधिकारों को विस्तार एवं प्रभावी ढंग से लागू करा सकते हैं

  • Harmonization of CBD and TRIPs

यह औपचारिक रूप से 1992 में पृथ्वी शिखर सम्मेलन के अंत में प्रस्तावित किया गया था

सीबीडी के संरक्षण और दुनिया के अनुवांशिक संसाधनों के लिए वैश्विक समुदाय द्वारा उठाए गए पहले निर्णायक कदम के रूप में देखा गया था

यह राज्यों में जैविक और अनुवांशिक संसाधनों के क्षेत्रों के भीतर खत्म हो रहे संप्रभु अधिकार के संरक्षण के लिए किया गया था क्योंकि अनुवांशिक संसाधन समृद्ध विकासशील देशों के लिए सीबीडी विशेष रूप से महत्वपूर्ण था

यह उन संसाधनों के उपयोग को विनियमित करने के लिए कानून को स्थापित कर सकता है इसके अलावा यह इस तरह के संसाधनों का उपयोग करने पर राष्ट्रीय कानूनों के विकास के लिए बहुपक्षीय समझौता व्यक्ति की रूपरेखा प्रदान करता है पिछले दो दशकों में जैव प्रौघोगिकी ने तेजी से प्रगति की है जैव प्रौघोगिकी की प्रगति अनुवांशिक संसाधनों पर है और इस तरह के उत्पादों पर पहुंचने के लिए तकनीकी का इस्तेमाल करने के लिए क्षमता का अधिकार विस्तार करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम था

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