SYED AJMAL HASAN [ADVO.]

                      NEW DELHI:मुस्लिम लॉ में वक्फ़ का एक महत्वपूर्ण स्थान है। वक़्फ़ के माध्यम अल्लाह की राह में संपत्तियों का अंतरण किया जाता है। वक्फ़ दान से सम्बंधित है ये दान अल्लाह के वास्ते अल्लाह की राह में किया जाता है इस तरह के दान का फायदा जनसाधारण को होता है, परंतु इस दान का मालिक अल्लाह को बनाया जाता है। वक्फ़ निजी और लोक दो तरह से किया जा सकता है परन्तु संपत्ति से लाभ जनसाधारण को होता है परंतु वह जनसाधारण उस संपत्ति का मालिक नहीं होता है।

                          कुरान में अल्लाह का हुक्म है कि जो भी संपत्ति तुम्हारे पास है उसमें से एक हिस्सा मज़लूम गरीबों का भी है। वक्फ़ के बारे में साफ तौर पर कुरान में लिखा हुआ नहीं मिलता फिर भी ऐसी बहुत सी आयत हैं जिनको वक़्फ़ से संबंधित माना जाता है। भारत में वक़्फ़ संबंधी नियमों में अबू यूसुफ की वक़्फ़ पर दी गयी अवधारणा को हनफ़ी विधि में मान्य किया गया है। एक जगह पर अबू यूसुफ लिखते हैं कि- ” संपत्ति को सर्वशक्तिमान ईश्वर के स्वामित्व के अंतर्गत स्थित कर देना तथा उसके लाभ या उत्पादों को मानव जाति के लाभ के लिए लगाना यह वक़्फ़ है।”

                       वक़्फ़ का स्वामित्व अल्लाह में निहित है वक़्फ़ अधीक्षक, प्रबंधक या रक्षक मुतवल्ली कहलाता है। वक़्फ़ के आवश्यक तत्व यह है कि किसी संपत्ति का स्थाई समर्पण अल्लाह को समर्पित कर देना चाहिए मुस्लिम विधि में धार्मिक पवित्र और खैराती समझे जाने वाले प्रयोजनों के लिए संपत्ति के उपभोग का एक सारवान समर्पण होना वक़्फ़ का एक आवश्यक तत्व है।

                      अबू युसूफ के अनुसार, वक्फ़ के लिये किसी मुतवल्ली का नियुक्त होना ज़रूरी नहीं है वक्फ़ की नियत करके पूर्ण रूप से अल्लाह की राह में देना वक्फ़ को पूर्ण कर देगा|

                      सुप्रीम कोर्ट ने छेदीलाल मिश्रा बनाम सिविल जज (2007) के मामला में कहा कि यदि एक बार वक़्फ़ को बना दिया जाता है तो वह हमेशा वक़्फ़ रहती है। किसी वक्फ़ की प्रकृति में मुतवल्ली के लिए अथवा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा बदलाव नहीं लाया जा सकता। वक़्फ़ में वाकिफ की स्वामित्व समाप्त हो जाता है और वह अल्लाह में निहित हो जाती है। वक़्फ़ की वैधता पर प्रश्न उठाया जा सकता है यदि यह सिद्ध कर दिया जाए कि वाकिफ़ वक़्फ़ के द्वारा अपने दायित्व से भागना चाहता है।

                          कोई भी व्यक्ति जो इस्लाम धर्म में विश्वास रखने वाला हो वो व्यक्ति वक़्फ़ कर सकता है। यदि कोई भी ऐसा व्यक्ति जो इस्लाम धर्म में विश्वास नहीं रखता है अथवा इस्लाम धर्म का अनुसरण करने वाला नहीं है तो उसके द्वारा दिया गया दान, खैरात वक़्फ़ की श्रेणी में नहीं आएगा। वक़्फ़ के लिए व्यक्ति का मुसलमान होना ज़रूरी है, क्योंकि वक़्फ़ में संपत्ति को अल्लाह की राह में रख दिया जाता है और संपत्ति का स्वामित्व अल्लाह को सौंप दिया जाता है। मुस्लिम विधि द्वारा मान्य किसी प्रयोजन के लिए वक़्फ़ का यह आवश्यक तत्व है कि वह मुस्लिम विधि के अंतर्गत किसी मान्य प्रयोजन के लिए किया जाना चाहिए। कोई भी वक़्फ़ ऐसे काम के लिए नहीं किया जा सकता जिसे इस्लाम द्वारा नाकारा गया है।

                        वक़्फ़ अधिनियम 1913 की धारा (3) वक़्फ़ के कुछ प्रावधानों का उल्लेख करती है। इस धारा के आधार पर मुस्लिम विधिवेत्ताओं ने अनेक मद दिये हैं जिनके प्रायोजन के लिए वक़्फ़ किया जा सकता है।

1-मस्जिद बनवाने के लिये|
2-मस्जिद में नमाज के संचालन के लिए इमामो का इन्तेज़ाम करना
3-हज़रत अली मुर्तुज़ा का पैदाइशी दिन मनाना।
4-इमामबाड़ो को बनवाना और उनकी की मरम्मत।
5-ख़ानक़ाहों को बनवाना और उनका संरक्षण।

6-गरीब आश्रित रिश्तेदारों का भरण पोषण।
7-फकीरों को दान।
8-ईदगाह को बनवाना और उनको दान देना ।
9-कालेजों को दान और कॉलेजों में शिक्षा देने के लिए अध्यापकों के लिए उपबंध।
10-पुल बनवाना और सराय।
11-मक्का, हज करने जाने के लिए गरीबों की मदद।
12-मोहर्रम के महीने में ताज़िए रखना और मोहर्रम में धार्मिक जुलूस के लिए ऊंट वग़ैरह का उपबंध।

                          वक़्फ़ का पंजीकरण भारतीय रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1908 के अधीन 100 रुपए या उससे अधिक मूल्य की स्थावर संपत्ति का वक़्फ़ दस्तावेज द्वारा किया जाना चाहिए। एक मामले में कहा गया कि कोई भी वक़्फ़ रजिस्ट्रेशन के माध्यम से होना चाहिए। वर्तमान में कोई भी स्थावर संपत्ति का वक़्फ़ पंजीकरण के माध्यम से ही होता है, जो पंजीयन तैयार किया जाता है उसे वक़्फ़नामा कहते है। 

 

कैसे किया जाता है वक़्फ,

                        मुस्लिम विधि में वक़्फ़ को करने के लिये अलग-अलग रीतियां बनाई गई हैं और चार रीतियों के आधार पर वक़्फ़ किया जा सकता है।
1) वक़्फ जीवित लोगों के बीच किसी कार्य के माध्यम से।
2) वसीयत के माध्यम से।
3) मृत्यु कारक रोग के पैदा होने पर (मर्ज़ उल मौत)
4) स्मरणातीत उपयोग के द्वारा। स्मरणातीत का अर्थ यह है कि कोई स्पष्ट वक़्फ़ नहीं किया गया है परंतु कोई संपत्ति एक लंबे समय से अनिश्चितकाल से वैसे समय से जिसका याद किया जाना संभव नहीं है वक़्फ़ के मान्य प्रयोजन में काम आ रही है। जैसे कोई संपत्ति कब्रिस्तान के रूप में उपयोग लायी ज रही है तो ऐसी संपत्ति को वक़्फ़ मान लिया जाता है।

 

कौन हो सकता है मुतवल्ली,

                          कोई भी व्यक्ति जो स्वास्थ्य चित्त तथा वयस्क हो और किसी विशेष वक़्फ़ के अंतर्गत आवश्यक कर्तव्यों का पालन कर सकता हो मुतवल्ली नियुक्त किया जा सकता है। वक़्फ़ के प्रबंधक या अधीक्षक को मुतवल्ली कहते है। मुतवल्ली वक़्फ़ का मालिक नहीं होता है वह केवल प्रबंधक या अधीक्षक होता है। मुस्लिम लॉ के अंतर्गत वक़्फ़ की गयी संपत्ति के स्वामित्व का अधिकार मुतवल्ली में नहीं रहता अल्लाह में रहता है। मुतवल्ली वक़्फ की देख रेख के लिये बनाया जाता है जो अधीक्षक या प्रबंधक मात्र होता है। उसका वक्फ संपत्ति में कोई लाभ नहीं होता है, वह केवल अल्लाह की रज़ा और मज़हब ए इस्लाम की खिदमत की नीयत से काम करता है।

कौन नियुक्त नहीं हो सकता,

1-गैर मुस्लिम

2-विदेशी व्यक्ति

 

किसके द्वारा नियुक्त किया जाता है,

 

1) संस्थापक।

2) संस्थापक की वसीयत के द्वारा।

3) अपनी मृत्यु शैया पर मुतवल्ली जिसे नियुक्ति दे।

4) न्यायालय।

5) वक़्फ़ बोर्ड।

 

                        वर्तमान समय में जो प्राचीन वक़्फ़ है, पुराने राजा महाराजाओं के समय की संपत्तियां है, ऐसी सभी संपत्तियों को वक्फ बोर्ड के अधीन कर दिया गया है। जैसे पुराने कब्रिस्तान, पुराने मज़ार, पुरानी दरगाह, पुरानी मस्ज़िद, पुरानी खानकाह इत्यादि ऐसी परिस्थिति में इन संपत्तियों का प्रबंधन वक्फ बोर्ड के हाथ में आ गया है। वक़्फ़ बोर्ड लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार के अधीन नियुक्त किया जाता है तो ऐसे पुराने वक़्फ़ में वक्फ बोर्ड द्वारा ही मुतवल्ली की नियुक्ति की जाती है। वर्तमान में वक्फ अधिनियम 1995 के प्रावधान वक़्फ़ से संबंधित मामलों में लागू हो रहे है। यह अधिनियम भारत में वक़्फ़ संबंधी विधि का सर्वोत्तम अधिनियम है। वर्तमान में इसी अधिनियम के माध्यम से केंद्रीय वक्फ बोर्ड और राज्यों के वक़्फ़ बोर्ड इत्यादि की नियुक्तियां की जा रही है तथा वक़्फ़ की संपत्तियों को सुरक्षित किया जा रहा है।

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